रायबरेली। शहर के इंदिरा नगर स्थित आईडीए पार्क में यजमान बीना पांडेय एवं राजेश कुमार पांडेय द्वारा संकल्पित श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन तितिक्षामूर्ति, ज्ञानगार ,परमहंस संत स्वामी सूर्य प्रबोध आश्रम (स्वामी स्वात्मानंद जी) महाराज ने कहा कि जीव ब्रह्म हो सकता है परंतु जीव सृष्टिकर्ता नहीं हो सकता। ईश के सामर्थय में और जीव के सामर्थ में अंतर है स्वामी जी ने कहा कि जो जीव ईश्वर की शरण में है, उसके जीवन में दुख नहीं रहता। उन्होंने कहा कि प्राणी मात्र को सदैव विवादों से बचना चाहिए उसे बहु वाद और अतिवाद से भी दूर रहना चाहिए। स्वामी जी ने कहा कि हमें अपने जीवन में शांत भाव से रहना चाहिए संवाद का सदुपयोग करें और परस्पर एक दूसरे का सहयोग करें। स्वामी जी ने बताया कि भगवान कृष्ण जब उद्धव को नंदगांव जाने के लिए कहते हैं और उन्हें बताते हैं कि ब्रज वासियों ने मेरी बाल चेस्टाओं को अत्यंत वात्सल्य के साथ सहन किया है। मेरी सारी प्रसन्नता तो ब्रज में ही रह गई है। गोपियों को मेरे अभाव का बोध है परंतु उन्हें मेरे शतरूप का बोध नहीं है। तुम उनके पास चले जाओ और उन्हें मेरे मेरे शतरूप का बोध कराओ। स्वामी जी ने कहाकि उद्धव इस कठिन कार्य को सहज रूप में स्वीकार कर लेते हैं क्योंकि मित्र और सेवक का यह धर्म है कि वह अपने मित्र और स्वामी को दुखी न होने दें। मित्र को प्रत्युपकार रहित सहयोग तथा सेवक को बिना किसी विशेष पारश्रमिक के स्वामी का ही चिंतन करना चाहिए।
इस अवसर पर समाज सेविका श्रीमती सुधा द्विवेदी द्विवेदी ,अमेठी भाजपा के नेता भवानी दत्त दीक्षित, संतोष बाजपेई ,मनोज कुमार सिंह बच्चा, वरुण पांडेय, तरुण पांडेय, आलोक द्विवेदी मनोज पांडेय बजरंगदास, गोपाल बाजपेई, जगदंबा तिवारी, करुणा शंकर दीक्षित ,लंबू बाजपेई, विष्णु शंकर अवस्थी आदि लोग उपस्थित रहे।
